मराठी और गैर-मराठी के मुद्दे पर शिवसेना को उसके गढ़ में जा कर चुनौती देने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा किशिवसेना कार्यकर्ताओं का विरोध लोगों को एकजुट करके दिया जाना चाहिए न कि हिंसा के जरिए।
शिवसेना के विरोध को आड़े हाथों लेते हुए राहुल ने कहा कि शुक्रवार को जब वह मुंबई की उपनगरीय ट्रेन पर सवार हो रहे थे तो वहां 15 से 20 सेना कार्यकर्ता काले झंडों के साथ थे लेकिन वहां हजारों लोग मेरे समर्थन के लिए भी आए हुए थे।
बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के राहुल एडथालाआए हुए थे। यहां उन्होंने छात्र नेताओं से कहा कि हमें इसी तरह से उनका विरोध करना चाहिए। हमें उनका विरोध हिंसा के जरिएनहीं बल्कि लोगों को एकजुट करके देना चाहिए।
शिवसैनिकों के विरोध को नजरअंदाज करते हुए राहुल ने शुक्रवार को अपने काफिले को छोड़कर लोकल ट्रेन से शिवसेना के गढ़ से होकर यात्रा की।
शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था कि मुंबई मराठियों के लिए का विरोध करने वाले राहुल का स्वागत काले झंडे दिखाकर किया जाए।
राहुल ने कहा कि भारत पर सभी भारतीयों का अधिकार है। अगर आप भारतीय हैं तो जिस तरह से आप अपने राज्य में रहते हैं, उसी तरह से आप देश के किसी भी भाग में रह सकतेहैं। चाहे आप केरल के हों या तामिल या पंजाबी। इससे कुछ अंतर नहीं पड़ता।
युवाओं का समर्थन हासिल करने के लिए देश भर में दौरे कर रहे राहुल ने कार्यकर्ताओं की एकजुटता के लिए छात्र संगठनों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस के राज्य नेतृत्व और पुलिस सहित हर किसी को चकमा देते हुए राहुल शनिवार की सुबह पुंडूचेरी से यहां आए। उन्होंने लक्षद्वीप से आए कार्यकर्ताओं और केरल छात्र संघ के राज्य स्तरीय सदस्यों व जिले के तकरीबन एक सौ निर्वाचित सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की अवधारणा ही संगठनों को मजबूत बना सकता है। राहुल ने काले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहन रखी थी।