प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत का जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट संघ की अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) और उसके नेतृत्व में पूरा विश्वास है और भारत इसका सभी तरह से समर्थन करेगा।
उल्लेखनीय है कि आईपीसीसी की हिमालय ग्लेशियरको लेकर दी गई रिपोर्ट में खामी निकलने के बाद उनका भारी विरोध हो रहा है। इसके अलावा उनके शानो-शौकत वाली जीवनशैली को लेकर भी पश्चिमी मीडिया ने उनपर हमला किया। पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठन ने भी शुक्रवार को आरके पचौरी के इस्तीफे की मांग की। ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का साथ राहत वाला है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोपेनहेगन समझौते के तहत किसी कानून प्रतिबद्धता का एक बार फिर खारिज करते हुए कहा कि कोपेनहेगन समझौता हमारी ओर से स्वैच्छिक प्रतिबद्धता का परिचायक है, न की बातचीत के जरिए कानूनी प्रतिबद्धता का।
मनमोहन सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत गंभीर है और इसके संरक्षण के लिए उठाए गए किसी भी वैश्विक प्रयास का भारत समर्थन करता है। उन्होंने कहाकि भारत इस प्रकार के प्रयास में अपना पूरा सहयोग देने को तैयार है।