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हर स्कूल में पुस्तकालय जरूरी है: कलाम
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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने स्कूलों में पुस्तकालयों की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि बच्चे किताबेंपढ़कर अपने अतीत को जानते हैं और वर्तमान का अनुभव करते हैं एवं भविष्य के बारे में सपने देखते हैं। डॉ. कलाम ने आज यहां बाल पुस्तकालय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। सम्मेलन का आयोजन ‘बाल साहित्य लेखकएवं चित्रकार संघ’ ने किया था। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में एक पुस्तकालय होना चाहिए ताकि बच्चों में किताबे पढ़ने कीआदत पड़े, उससे वे नई चीजें सीखेंगे। उन्होंने कहा कि पढ़ने-लिखने से रचनात्मकता बढ़ती है और रचनात्मकता से चिंतन बढ़ता हैऔर चिंतन से ज्ञान और ज्ञान से व्यक्ति महान बनता है। यही पुस्तकालयों का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि बच्चों की आकांक्षाओं तथा सपनों से देश का भविष्य सजता-संवरता है। उन्होंने कहा कि बाहरी बच्चों के लिए ज्ञान ‘इलेक्ट्रॉनिक रूप’ मेंहोना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने पर्यावरण तथा अभिभावकों तथा शिक्षकों के व्यवहार से भी सीखते हैं। उनके सवालों का जवाब सही ढंग से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर किसी को कम-से-कम एक घंटा पुस्तकें जरूर पढ़नी चाहिए। और हर पांचवेंपिता को अपने घर में एक पुस्तकालय खोलना चाहिए, ताकि बच्चे अपने अभिभावकों से ज्ञान प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा किहर गांवों को पुस्तकालयों से जोड़ा जाना चाहिए और बच्चों को हर देश, हर धर्म, हर संस्कृति की पुस्तक पढ़नी चाहिए।
 
 
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