संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को कहा कि विश्व में होने वाले ग्रीन हाउस गैसों के कुल उत्सर्जन में 78 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले 56 देशों ने कार्बन कटौती के लिए घरेलू स्तर पर उठाए जाने वाले अपने लक्ष्यों से विश्व निकाय की जलवायु परिवर्तनपर प्रारूप संधि [यूएनएफसीसीसी] को अवगत करा दिया है।
यूएनएफसीसीसी के कार्यकारी सचिव यूवो डी बोएर ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह भी साफ कर दिया कि कोपेनहेगन में अमेरिका और भारत सहित बेसिक देशों के समूह तथा अन्य देशों के बीचहुआ समझौता औरपचारिक वार्ता का हिस्सा नहीं है और न ही इसे संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि कोपेनहेगन समझौते ने सभी सवालों के जवाब नहीं दिए हैं, लेकिन फिर भी इसका राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य जाहिर करने की संरा महासचिव बान की मून की ओर से निर्धारित 31 जनवरी की समय सीमा केबारे में पूछे जाने पर बोएर ने कहा, गत 31 जनवरी तक कुल 56 देशों ने कार्बन उत्सर्जन में घरेलू स्तर पर कटौती करने के प्रण जाहिर किए हैं। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामले में इन देशों की हिस्सेदारी 78 फीसदी है।
उन्होंने कहा, हालांकि, 26 अन्य देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने लक्ष्य तो नहीं सौंपे हैं लेकिन संकेत दिए हैं कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती की कोशिशों के साथ हैं।
बोएर ने कहा कि कोपेनहेगन सम्मेलन के हालांकि तीन फायदे भी रहे हैं। पहला, इसके जरिए जलवायु परिवर्तनके मुद्दे को उच्चतम वैश्विक राजनीतिक स्तर पर उठाया गया। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच इस मुद्दे की जरूरत को पहचानने को लेकर व्यापक आम सहमति बनी और तीसरा, इसने मैक्सिको में इस वर्ष के अंत में होने वाली दूसरी दौर की बातचीत का मार्ग प्रशस्त किया।
बोएर ने कहा कि अब मैक्सिको सम्मेलन से पहले की रूपरेखा तय करने के लिए आगामी जून में बॉन [जर्मनी] मेंबैठक होगी।
बोएर ने यह भी साफ कर दिया कि जो देश तय समयावधि तक अपनी घरेलू योजना को आकार नहीं दे पाए हैं, वे बाद में भी अपने लक्ष्य बता सकते हैं।