सदियों से इंसान की सबसे बड़ी ख्वाहिश, सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा अमर होने की रही है। यह अलग बात है कि तमाम कोशिशों के बावजूद ऐसा अभी तक संभव नहीं हो सका है लेकिन एक अमेरिकी वैज्ञानिक रे कुर्जवील ने दावा किया है कि नैनोटेक्नोलाजी की मदद से इंसान अगले 20 सालों में अमर हो सकता है। इसी नैनो तकनीक के चलते अगले दो दशकों में शारीरिक क्रियाविधि को लेकर हमारी समझ भी खासी बढ़ जाएगी।
61 वर्षीय रे ने भविष्य में काम आने वाली तकनीकों के बारे में कहा कि मैं और मेरे कई साथी वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 20 सालों में हम पाषाण युग से चले आ रहे शरीर के प्रोग्राम को बदल देंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो नैनोटेक्नोलाजी की मदद से शरीर की मूलभूत क्रियाविधि बदली जा सकेगी। इससे उम्र का बढ़ना भी रुक जाएगा और तब हम बुढ़ापे परविराम या जवानी को लौटा सकेंगे।
कुर्जवील को आला दर्जे का भविष्यवादी करार देते हुए दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स ने कहा, हम मानवीय इतिहास के सबसे उत्कृष्ट काल में रहने जा रहे हैं। उस दौर में हम कंप्यूटर तकनीक और जींस को समझने मेंआज के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम होंगे।
कुर्जवील के मुताबिक, जानवरों में रक्तकणिकाओं के आकार की पनडुब्बियों का परीक्षण किया जा चुका है। इन पनडुब्बियों को नैनोबोट्स नाम दिया गया है। इन नैनोबोट्स का प्रयोग बिना आपरेशन किए ट्यूमर और थक्के को दूर करने में किया जाएगा। जल्द ही नैनोबोट्स रक्तकणिकाओं का स्थान ले लेंगी। यही नहीं रक्तकणिकाओं की तुलनामें ये नैनोबोट्स हजार गुना ज्यादा प्रभावकारी होंगी।
ला आफ एक्सेलेरेटिंग रिटंर्स पर आधारित इस अवधारणा में अगले 25 सालों में इंसान की तकनीकी क्षमता अरबों गुना बढ़ जाएगी। आप बिना सांस लिए 15 मिनट में मैराथन या चार घंटे तक स्कूबा डाइविंग कर सकेंगे।
क्या होगा तकनीक के दम से:-
कुर्वजील के मुताबिक 2150 तक हमारे पास शरीर व मस्तिष्क की सूचनाओं को जानने के लिए खासा बैकअप होगा। आप कह सकते हैं कि शरीर की कोई भी क्रियाविधि अनछुई नहीं रह जाएगी। जाहिर है सारी चीजें ज्ञात होने की स्थिति में इंसान अमर हो जाएगा।
नैनो तकनीक के दम से इंसान के मस्तिष्क की क्षमता इतनी बढ़ जाएगी कि हम कुछ मिनटों मेंकिताब लिख सकेंगे। रे के मुताबिक, उस समय यदि आप वर्चुअल-रियलिटी [काल्पनिक सच्चाई] मोड में जाना चाहेंगे तो नैनोबोट्समस्तिष्क को संदेश भेजना बंद कर देंगी। बस, इसके बाद तो आप कुछ भी कुछ सोचने के लिए स्वतंत्र हैं। मस्तिष्क में बनने वाले त्रिविमीय [3-डी] चित्रों से यह पता लगाया जा सकेगा कि वर्तमान में क्या हो रहा है।