महिलाओं के सबसे अच्छे दोस्त हीरे मरीजों के भी अच्छे दोस्त साबित हो सकते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकोंने अपने शोध में पाया कि शुद्ध कार्बन से बने हीरों की क्रिस्टल वाली जालियों में छोटे दोष होते हैं।
इनमें एक आम अशुद्धि नाइट्रोजन की रिक्तता की होती है। इसमें नाइट्रोजन का एक परमाणु कार्बन के दो परमाणुओं की जगह लेता है, जिससे एक कार्बन परमाणु की जगह बच जाती है और इसी कारण हीरे में चमक पैदा होती है। ये वास्तव में फ्लोरेसैंट होते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस फ्लोरेसैंस में थोड़े बदलाव से नाइट्रोजन के एक इलैक्ट्रॉन के मैगनैटिक स्पिन का पता लगाया जा सकता है।स्पिन के क्वांटम गुण में दो मानक ऊपर या नीचे होते हैं और बायनरी गणना केएक और जीरो को दर्शा सकते हैं। इस दल की उपलब्धिक्वांटम की इस जानकारी को नाइट्रोजन इलैक्ट्रॉन और बगल के कार्बन परमाणुओं के न्यूक्लियसों के बीच बार-बार स्थानांतरित करके लॉजिक ऑपरेशन के सक्षम एक छोटा सर्किट बनाना था।
एक क्वांटम बिट की स्पिन जानकारी को जानना किसी भी क्वांटम कंप्यूटर के लिए सबसे मौलिक कार्य होता है। यह बेहद मुश्किल होता है लेकिन दल ने इलैक्ट्रॉन और न्यूक्लियस के बीच संदेशोंको बार-बार भेजकर दिखाया कि इस जानकारी की विस्तृत व्याख्या की जा सकती है।
शीर्ष वैज्ञानिक जैकब टेलर ने बताया कि क्वांटम गणना के क्षेत्र में यह प्रारंभिक जानकारी है और चिकित्सा जगत क्वांटम कंप्यूटर बनने से पहले ही इसका फायदा उठा सकता है। टेलर ने कहा कि इस तकनीक का बुरा प्रभाव नाममात्र है। यह एक कोशिका की भी अच्छे से पड़ताल कर सकता है और इससे हमेंवहां चल रही गतिविधियों का पता चल सकता है।
फिजिक्स एंड कैमैस्ट्री जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन का इस्तेमाल क्वांटम कंप्यूटर के विकास में होना है लेकिन इससे चिकित्सा जगत को तत्काल फायदा पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, क्वांटम बिट की चुंबकीय क्षेत्र में अति संवेदनशीलता से ऐसे एमआरआई यंत्र बन सकते हैं जो जीवित कोशिकाओं की जांच कर सकते हैं।